Saturday, April 20, 2013



अपने हुए पराये , पराये अपने हो गए 
क्या दौर आ गया है , क्या दौर आ गया है 

सिर्फ अपनी बात नहीं , घर -२ की यही कहानी 
क्या दौर आ गया है , क्या दौर आ गया है 

सितमगर होता आजाद , मासूम बनता कैदी 
क्या दौर आ गया है , क्या दौर आ गया है 

धर्म के ठेकेदार भी हुए फरेबी , थोड़ी बची इमानदारी 
क्या दौर आ गया है , क्या दौर आ गया है 

इंसान बना हैवान , बेजुबान बना दयालु 
क्या दौर आ गया है , क्या दौर आ गया है 

Friday, February 15, 2013



हर हसीना से नजर चुराने लगे
तुम से नजर मिली तो मुस्कुराने लगे 

हर हसीना को कमतर पाने लगे 
तुम्हारी सूरत दिल  में बसाने लगे 

तेरी मूहब्बत का लुत्फ़ उठाने लगे 
दिल के दरवाजे खोल दे रेयाज़ 
सनम इसमें तसरीफ लाने लगे 

मौत से कम जुदाई से घबराने लगे 
पर तुम मेरे साथ हो इसलिए 
जमाने की नजर से नजर मिलाने लगे 

Thursday, February 14, 2013





मेरे जिस्म के हर हिस्से पे तेरे होंटों के निशान होंगे
तेरे जिस्म के हर हिस्से पे मेरा वजूद

तेरे जिस्म से कस्तूरी की महक आती होगी
मै तुझमे और तुम मुझमे खो जाते होंगे

दूर आसमान में काली घटा छा जाती होगी
 टिप टिप बारिश की बुँदे गिरते होंगे

मिलन की आखिरी बेला में हम दोनों
बारिश में खूब नहाते होंगे



Sunday, February 3, 2013

तेरा प्यार मुझसे सब करा लेगा
जो अब  तक न किया 

तेरी इक ख़ामोशी कई सवाल पैदा करते है 
जिसका जवाब अब तक न दिया 

तेरी बातों में वो कशिश है के 
किसी बहाने से वो बात करते है
जो अब तक किसी से न किया 

तेरा वो  बातो बातो में खिलखिलाकर 
हँसना तो  जैसे मन में मिशरी घोले 
ऐसा तो पहले किसी ने न किया 

तेरे हुश्न का जादू  ऐसा चला के 
इस कदर मदहोश किसी ने न किया 

जैसी हो वैसी ही रहना तेरे प्यार ने 
मुझे रात भर सोने न दिया 

 हर वो बात मानूँगा जो तुम कहोगे 
तेरी ख़ामोशी ने मुझे चैन से रहने न दिया 

कल शाम तू मुझसे न  मिली 
तेरी याद ने नींद से सोने न दिया

Friday, December 7, 2012

कल फिर तेरा अक्स देखा मैने एक हसीना में
दिल की बात जुबान पे आ गई पहले की तरहा 

जब आँख खुली तो तेरी परछाई मिली उस नाजनीना में 
तुम क्या बिछरे,

दिल दस्तक दे रहा है दिल पे 
तुम जैसी एक हसीना के 

ऐसा लगता है वो तुम ही हो, 
बस तुम, 

जरा बताओ ! क्या तुम फिर मिलोगी 
परछाई बनकर उस नाजनीना में ?


गुलाब की पंखुरियो जैसी तेरी होंटो की लाली
तेरे दो नैनो में लिपटा बन के काजल काली

तू जिधर देखे मै उधर मिलू
जैसे बगिया में माली

तू सुन्दरता की मूरत है,
जिसके तन मन में प्यार है खाली

तेरी जुल्फों में लिपटकर,
मांगू  तुमसे खुशाहाल़ी

आ तुझको मई सैर करा दू
जरा दिखा दू जन्नत की हरियाली


चमकते चाँद को देखा था
जो कहीं गूम हो गया है

कुसूर मेरी आँखों का है
जो तेरा अक्स ढू न्ढ रहा है

चाँद तो चाँद है तेरा अक्स हो नहीं सकता
ये जालिम दिल ही ऐसा है

जिसे तेरा अक्स कही और दिख गया है
जिसमे तेरा अक्स दिख रहा है

उसका दिल एक तितली की तरह है
जिसका ठिकाना बार बार बदल रहा है

क्योकि ये उसकी फितरत में शामिल हो गया है
तू कभी ऐसी न थी,
जाने तेरे दिल आलम ऐसा क्यों हो गया है