Sunday, July 20, 2014
Thursday, May 2, 2013
न मिल सकूँ जिंदगी में तो बेवफा न समझना
क्या करूँ वक्त और हालात तुमसे मिलने की इजाजत नहीं देते
प्यार तो सच्चा है ये अपना लेकिन
जमाने की रश्मो रिवाज हमें साथ साथ चलने नहीं देते
माना की इसमें हम दोनों की खता नहीं पर
ये फासले चैन से जीने नहीं देते
गर मुझसे कोई खता हुई तेरी नजर में तो माफ़ी देना
ये उलझन मुझे रात भर सोने नहीं देते
ताकयामत दिल में चराग जलाए रखना" रेयाज़ " कयोकी
चाह कर भी दिल , दिल से जुदा होने नहीं देते
Saturday, April 20, 2013
अपने हुए पराये , पराये अपने हो गए
क्या दौर आ गया है , क्या दौर आ गया है
सिर्फ अपनी बात नहीं , घर -२ की यही कहानी
क्या दौर आ गया है , क्या दौर आ गया है
सितमगर होता आजाद , मासूम बनता कैदी
क्या दौर आ गया है , क्या दौर आ गया है
धर्म के ठेकेदार भी हुए फरेबी , थोड़ी बची इमानदारी
क्या दौर आ गया है , क्या दौर आ गया है
इंसान बना हैवान , बेजुबान बना दयालु
क्या दौर आ गया है , क्या दौर आ गया है
Sunday, February 3, 2013
तेरा प्यार मुझसे सब करा लेगा
जो अब तक न किया
तेरी इक ख़ामोशी कई सवाल पैदा करते है
जिसका जवाब अब तक न दिया
तेरी बातों में वो कशिश है के
किसी बहाने से वो बात करते है
जो अब तक किसी से न किया
तेरा वो बातो बातो में खिलखिलाकर
हँसना तो जैसे मन में मिशरी घोले
ऐसा तो पहले किसी ने न किया
तेरे हुश्न का जादू ऐसा चला के
इस कदर मदहोश किसी ने न किया
जैसी हो वैसी ही रहना तेरे प्यार ने
मुझे रात भर सोने न दिया
हर वो बात मानूँगा जो तुम कहोगे
तेरी ख़ामोशी ने मुझे चैन से रहने न दिया
कल शाम तू मुझसे न मिली
Subscribe to:
Posts (Atom)






